नीलेश यादव जिला ब्यूरो
नर्मदापुरम 18,जून,2026 (हिन्द संतरी ) विश्व पर्यावरण दिवस एवं अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मध्य कृषि आधारित विशेष अभियान के अंतर्गत भाऊसाहब भुस्कुटे स्मृति लोक न्यास गोविंदनगर के कृषि विज्ञान केंद्र गोविंदनगर, बनखेड़ी में गुरुवार को जिला स्तरीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला सह प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, जिला नर्मदापुरम एवं सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन “आत्मा” के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
रासायनिक उर्वरकों पर अधिक निर्भरता मानव एवं मृदा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक खेती को अपनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। प्राकृतिक खेती पर्यावरण एवं वातावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी कदम है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे कम से कम अपने दैनिक उपयोग के लिए अनाज, फल एवं सब्जियों का उत्पादन प्राकृतिक पद्धति से करना प्रारंभ करें। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं बल्कि भविष्य की भी जरूरत है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम किए जाने की अपील करते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों का निरंतर प्रयोग केवल मानव स्वास्थ्य के लिए ही हानिकारक नहीं है बल्कि इससे आपकी कृषि भूमि का स्वास्थ्य भी खराब होता है तथा रासायनिक उर्वरकों की अधिक उपयोग के कारण मिट्टी भी अपनी उर्वरता क्षमता खोने लगती है। कलेक्टर श्री मिश्रा ने प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विकासखंड सोहागपुर की महिला कृषक एवं कृषि सखी सुश्री पूजा पंदराम को जिले का “प्राकृतिक खेती एम्बेसडर” घोषित किया।
प्राकृतिक खेती से लागत घटेगी, मिट्टी और स्वास्थ्य रहेगा सुरक्षित
कार्यक्रम में उपसंचालक कृषि डॉ. रविकांत सिंह ने प्राकृतिक खेती के प्रमुख उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पोषक तत्व प्रबंधन, पौध संरक्षण, उत्पादन लागत में कमी, मिट्टी एवं पर्यावरण संरक्षण तथा सुरक्षित एवं गुणवत्तायुक्त कृषि उत्पादन प्राकृतिक खेती के प्रमुख आधार हैं। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को देखते हुए प्राकृतिक खेती समय की मांग बन गई है।
कार्यशाला में डॉ. राजेंद्र पटेल ने बायो रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) आधारित प्राकृतिक खेती मॉडल की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जैव उत्पाद केंद्रों के माध्यम से किसानों को जैविक आदानों की उपलब्धता, प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन तथा विपणन सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक क्लस्टर में जैव उत्पाद केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
उप परियोजना संचालक “आत्मा” श्री गोविंद मीना ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन एवं परम्परागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी किसानों को दी। वहीं श्री सुरेश पटेल ने किसानों से प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाकर जिले को प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में अग्रणी बनाने का आह्वान किया।
भाऊसाहब भुस्कुटे स्मृति लोक न्यास के उपाध्यक्ष श्री उम्मेद सिंह पटेल ने प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में अपने 75 वर्षों के अनुभव किसानों के साथ साझा किए। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाने में उत्साह दिखाया तथा विशेषज्ञों से विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत हिमांशु जैन, तहसीलदार बनखेड़ी अंजू लोधी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बनखेड़ी श्रीमती रीना कुमरिया, न्यास के उपाध्यक्ष मकरन सिंह पटेल, सदस्य अनिल बारोलिया, प्रबंधक धर्मेन्द्र गुर्जर, सहायक संचालक चेतन मातीखाये, प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. ब्रजेश कुमार नामदेव सहित कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, जन अभियान परिषद, राज्य आजीविका मिशन तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत बीआरसी कृषक, कृषि सखियां, प्राकृतिक खेती प्रमाणीकरण संस्था, परम्परागत कृषि विकास योजना के सेवा प्रदाता तथा बनखेड़ी, पिपरिया एवं सोहागपुर विकासखंडों से आए 300 से अधिक किसान भाई-बहनों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के अंत में कृषि विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार गर्ग ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
