नीलेश यादव जिला ब्यूरो
नर्मदापुरम(हिन्द संतरी ) सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत जिला प्रशासन नर्मदापुरम एवं कृषि विज्ञान केंद्र गोविंदनगर के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को भाऊसाहब भुस्कुटे स्मृति लोक न्यास, गोविंदनगर के कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में जिला स्तरीय “प्राकृतिक खेती कार्यशाला सह मेला” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नर्मदापुरम-नरसिंहपुर सांसद श्री दर्शन सिंह चौधरी, राज्यसभा सांसद श्रीमती माया नारोलिया, विधायक श्री ठाकुरदास नागवंशी, श्रीमती प्रीति शुक्ला एवं कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए 700 से अधिक किसान बंधुओं ने सहभागिता की। किसानों को प्राकृतिक खेती के महत्व, इसके विभिन्न तरीकों तथा कृषि क्षेत्र में उपयोग की जा रही नवीन तकनीकों के संबंध में विशेषज्ञों द्वारा जानकारी दी गई। कार्यशाला का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ खेती को अधिक टिकाऊ, मृदा एवं पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए प्रेरित करना रहा।

कृषि यंत्रों एवं उत्पादों की प्रदर्शनी
प्राकृतिक खेती कार्यशाला सह मेले में फसल अवशेष प्रबंधन पर आधारित कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी लगाई गई। किसानों ने विभिन्न कृषि यंत्रों की कार्यप्रणाली एवं उपयोगिता की जानकारी प्राप्त की। इसके साथ ही विभिन्न विभागों तथा प्रगतिशील किसानों द्वारा उत्पादित कृषि एवं अन्य उपयोगी उत्पादों की वृहद प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।
प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन, कृषि में नवीन तकनीकों के उपयोग तथा स्थानीय स्तर पर तैयार किए जा रहे उत्पादों की जानकारी दी गई। प्रगतिशील किसानों द्वारा अपनाई जा रही नवाचारपूर्ण कृषि पद्धतियों एवं उनके उत्पादों ने भी मेले में किसानों का ध्यान आकर्षित किया। कार्यशाला के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने, मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने, फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने तथा आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों को अपनाकर कृषि को अधिक लाभकारी एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए प्रेरित किया गया।

प्राकृतिक खेती से समृद्ध किसान, स्वस्थ मिट्टी और सुरक्षित भविष्य की ओर कदम: सांसद श्री दर्शन सिंह चौधरी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नर्मदापुरम-नरसिंहपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री दर्शन सिंह चौधरी ने क्षेत्र में किसानों के हित में संचालित योजनाओं के लिए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे कम से कम एक एकड़ भूमि में स्वयं के उपयोग के लिए प्राकृतिक खेती प्रारंभ करें। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को अपनाने से खेती की लागत को कम करने के साथ-साथ कृषि एवं मानव स्वास्थ्य के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकता है।
श्री चौधरी ने क्षेत्र में लगातार घटते जल स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए किसानों से उर्वरकों के संतुलित एवं कम उपयोग, फसल विविधीकरण, फसल चक्रण, मृदा संरक्षण तथा जल संरक्षण को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि खेती में ऐसे तरीकों को अपनाने की आवश्यकता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए भूमि की उर्वरता एवं जल संसाधन सुरक्षित रह सकें।
मिट्टी का स्वास्थ्य बचाएंगे, तो आने वाली पीढ़ी का भविष्य संवारेंगे : राज्यसभा सांसद श्रीमती माया नारोलिया
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद श्रीमती माया नारोलिया ने भी किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज की नींव स्वस्थ भोजन से होती है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर आने वाली पीढ़ी को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण खान-पान उपलब्ध कराया जा सकता है तथा उन्हें विभिन्न बीमारियों से बचाने में भी सहायता मिल सकती है।

किसान भाई रसायनिक उर्वरकों का करें कम उपयोग, फसल चक्रण और जल संरक्षण अपनाएं : विधायक श्री ठाकुरदास नागवंशी
पिपरिया विधायक श्री ठाकुरदास नागवंशी ने किसानों से मानव स्वास्थ्य की तरह मृदा स्वास्थ्य की भी देखभाल करने का आग्रह किया। उन्होंने मृदा में कार्बन की मात्रा बढ़ाने के लिए फसल अवशेष प्रबंधन को अपनाने तथा नरवाई नहीं जलाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि मृदा का स्वास्थ्य बेहतर होगा तो कृषि उत्पादन की स्थिरता भी बनी रहेगी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।
जल, जमीन और स्वास्थ्य बचाने प्राकृतिक खेती को अपनाएं: श्रीमती प्रीति शुक्ला
श्रीमती प्रीति शुक्ला ने किसानों को आत्मनिर्भर बनने तथा कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती वर्तमान के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।
रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें किसान, जल और मृदा संरक्षण पर करें ध्यान केंद्रित : कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा
कार्यक्रम में कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा ने कहा कि नर्मदापुरम जिला मां नर्मदा के तट पर बसा है और नर्मदा का प्रभाव जिले की कृषि एवं फसलों पर भी दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि अब सस्टेनेबल कृषि की ओर बढ़ने का समय आ गया है। कलेक्टर श्री मिश्रा ने कहा कि कृषि को मानव स्वास्थ्य के अनुकूल बनाना होगा। उन्होंने अत्यधिक मात्रा में उर्वरकों के उपयोग से मानव जीवन पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों के प्रति किसानों को जागरूक किया तथा प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि खेती और मानव स्वास्थ्य को एक-दूसरे से जोड़कर देखने की आवश्यकता है। कलेक्टर ने किसानों से नरवाई नहीं जलाने एवं फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों को खेत में उपयोग करने से मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायता मिलती है तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र में सहायक प्राध्यापक कृषि महा.पवारखेडा, डॉ. धनंजय कटहल ने फसलों में कीट व्याधि की पहचान एवं प्रबंधन के बारे में किसानो को बताया, सहायक प्राध्यापक, कृषि महा.पवारखेडा, डॉ. दीपक खांडे ने अलनीनो के विपरीत प्रभाव से फसलों का प्रबंधन संबंध में किसानो को तकनीकी जानकारी दी, कृषि विज्ञान केंद्र गोविंदनगर से वैज्ञानिक डॉ. राजेन्द्र पटेल द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन पर किसानो को जानकारी दी।
कार्यक्रम में एसपी श्री साई कृष्ण एस थोटा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत नर्मदापुरम श्री हिमांशु जैन, तहसीलदार बनखेडी सुश्री अंजू लोधी, श्री सुरेश पटेल, सदस्य – ICAR भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान भोपाल श्री नीतिराज पटेल, श्री माधवदास अग्रवाल ,भाऊसाहब भुस्कुटे स्मृति लोक न्यास गोविन्दनगर के उपाध्यक्ष श्री उम्मेद सिंह पटेल, श्री मकरन सिंह पटेल, सचिव श्री केशव माहेश्वरी, न्यास के प्रबंधक श्री धर्मेन्द्र गुर्जर एवं संयुक्त संचालक कृषि, श्री मनोहर देवके, परियोजना संचालक आत्मा श्री जे. एल. कासदे तथा कृषि सम्बंधित विभागों के अधिकारी एवं केंद्र के समस्त कृषि वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम सहायक उपस्थित रहे। कार्यशाला के अंत में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. ब्रजेश कुमार नामदेव द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया एवं कार्यक्रम समापन हुआ।
