14 जून 1996 को तेलंगाना के Nizamabad में जन्मीं निकहत जरीन का बचपन सामान्य परिवार में बीता। उनके परिवार में खेलों का माहौल जरूर था, लेकिन बॉक्सिंग को लेकर सभी की सोच एक जैसी नहीं थी। निकहत के चाचा बॉक्सिंग कोच थे और वे उनके भाइयों को प्रशिक्षण देते थे। यहीं से निकहत की रुचि भी इस खेल की ओर बढ़ी। हालांकि, जब उन्होंने खुद बॉक्सर बनने की इच्छा जताई तो परिवार के कई सदस्य इसके पक्ष में नहीं थे। उनकी मां भी नहीं चाहती थीं कि बेटी मुक्केबाजी जैसे कठिन और जोखिम भरे खेल में करियर बनाए। केवल उनके पिता ने उनका साथ दिया और उनके सपनों को पंख देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
महज 13 वर्ष की उम्र में निकहत ने तय कर लिया था कि उन्हें बॉक्सिंग में ही अपना भविष्य बनाना है। पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कठिन परिश्रम और अनुशासन को अपना हथियार बनाया। शुरुआती दौर में उन्होंने अपने चाचा से प्रशिक्षण लिया और धीरे-धीरे स्थानीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी।
उनकी मेहनत का पहला बड़ा परिणाम 2011 में देखने को मिला, जब उन्होंने महिला जूनियर और यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया। इसके बाद 2014 में यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल कर उन्होंने अपने प्रतिभाशाली खिलाड़ी होने का प्रमाण दिया।
हालांकि सफलता की राह आसान नहीं थी। करियर के महत्वपूर्ण दौर में कंधे की गंभीर चोट ने उन्हें बड़ा झटका दिया। दाहिने कंधे की हड्डी टूटने के कारण उन्हें सर्जरी करानी पड़ी और लगभग एक वर्ष तक रिंग से दूर रहना पड़ा। कई खिलाड़ियों का करियर ऐसी परिस्थितियों में प्रभावित हो जाता है, लेकिन निकहत ने हार नहीं मानी। कठिन पुनर्वास प्रक्रिया के बाद उन्होंने शानदार वापसी की और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में फिर से पदक जीतना शुरू कर दिया।
साल 2021 में बैंकॉक में आयोजित एशियाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने अपनी वापसी का दमदार संकेत दिया। इसके बाद 2022 उनके करियर का स्वर्णिम वर्ष साबित हुआ। तुर्किये के इस्तांबुल में आयोजित विश्व महिला मुक्केबाजी चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर पहली बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। इसी वर्ष उन्होंने Commonwealth Games 2022 में भी स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया।
निकहत का विजय अभियान यहीं नहीं रुका। 2023 में उन्होंने लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनकर इतिहास रच दिया। वह भारतीय दिग्गज मुक्केबाज Mary Kom के बाद विश्व चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बनीं। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2022 में प्रतिष्ठित Arjuna Award से सम्मानित किया।
आज निकहत जरीन केवल एक सफल खिलाड़ी नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल बन चुकी हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा सफलता के रास्ते में स्थायी नहीं बन सकती।
