रिपोर्ट में बताया गया कि फाइनेंशियल सेक्टर के बाद कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी सेक्टर की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत रही, जबकि इंडस्ट्रियल सेक्टर ने 11 प्रतिशत योगदान दिया। यह दर्शाता है कि निवेशकों का रुझान मुख्य रूप से वित्तीय और उपभोक्ता आधारित कंपनियों की ओर बना हुआ है
एसएमई SME सेगमेंट में अलग रुझान देखने को मिला। यहां इंडस्ट्रियल सेक्टर 36 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा, जबकि कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी 23 प्रतिशत और मटेरियल सेक्टर 10 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शामिल रहे। यह दिखाता है कि छोटे और मझोले उद्योगों में औद्योगिक कंपनियों की भागीदारी ज्यादा है
मेनबोर्ड आईपीओ की बात करें तो अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच 99 कंपनियों ने आईपीओ के जरिए 1,65,036 करोड़ रुपए जुटाए। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में भी मजबूत वृद्धि को दर्शाता है, जहां 79 कंपनियों ने 1,62,517 करोड़ रुपए जुटाए थे
हालांकि, एसएमई आईपीओ में कुछ गिरावट देखी गई है। वित्त वर्ष 2026 में अब तक 105 एसएमई आईपीओ लिस्ट हुए, जिनसे कुल 5,121 करोड़ रुपए जुटाए गए, जबकि पिछले वर्ष 163 आईपीओ के जरिए 7,111 करोड़ रुपए जुटाए गए थे
निवेशकों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है। फरवरी 2026 तक एनएसई पर पंजीकृत निवेशकों की संख्या 12.8 करोड़ तक पहुंच गई। हर महीने औसतन 13.6 लाख नए निवेशक बाजार से जुड़ रहे हैं, जो भारत के पूंजी बाजार की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है
राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र 2 करोड़ से अधिक निवेशकों के साथ पहला राज्य बन गया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल और राजस्थान प्रमुख निवेशक आधार वाले राज्य हैं
