बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया कि गठबंधन में शामिल 25 राजनीतिक दलों ने पांच प्रमुख प्रस्तावों पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों का उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा करना, चुनावी प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देना है।
बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णयों में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने पर सहमति शामिल है। गठबंधन का कहना है कि मतदाता अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मामलों पर गंभीर चिंता है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान में लाया जाएगा। इसके साथ ही NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग को भी बैठक में समर्थन मिला।
गठबंधन नेताओं ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि इस स्थिति की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और उच्च स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसी कारण शिक्षा मंत्रालय की भूमिका पर सवाल उठाते हुए इस्तीफे की मांग को एजेंडे में शामिल किया गया।
बैठक में आर्थिक स्थिति पर भी चर्चा हुई और सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग रखी गई। विपक्षी दलों ने कहा कि महंगाई, रोजगार और निवेश की धीमी रफ्तार देश की आर्थिक चुनौतियों को बढ़ा रही है। इसके साथ ही छोटे और मध्यम उद्योगों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई।
गठबंधन ने यह भी निर्णय लिया कि अब से हर दो महीने में नियमित रूप से बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि राजनीतिक रणनीति और साझा मुद्दों पर लगातार समन्वय बना रहे। अगली बैठक हैदराबाद में निर्धारित की गई है, जिसमें आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
बैठक में यह भी कहा गया कि संसद के भीतर विपक्षी दलों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा, ताकि सरकार से जुड़े मुद्दों पर एक संयुक्त और प्रभावी आवाज उठाई जा सके। नेताओं ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों के दुरुपयोग और विपक्षी दलों के साथ भेदभाव जैसे मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा की जरूरत है।
इस बैठक में कई प्रमुख क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दल शामिल हुए, जबकि कुछ दलों ने वर्चुअल रूप से भाग लिया। हालांकि कुछ राजनीतिक दलों की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय रही, लेकिन कुल मिलाकर बैठक को विपक्षी एकजुटता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
गठबंधन ने यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना और जनता से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाना है। बैठक के अंत में यह संदेश भी दिया गया कि आने वाले समय में विपक्षी एकता और समन्वय को और अधिक मजबूत किया जाएगा, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच तैयार किया जा सके।
