वहीं भारत सरकार या प्रधानमंत्री की ओर से 2026 को लेकर सोने की खरीद, पेट्रोल-डीजल खर्च या घरेलू बचत जैसी किसी विशेष अपील का कोई आधिकारिक बयान सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया गया है। ऐसे दावे अक्सर सोशल मीडिया पर संदर्भ से हटकर फैलाए जाते हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बनती है।
वर्तमान समय में दुनिया भर में महंगाई, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव जरूर देखा जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन्हें किसी “भविष्यवाणी” से जोड़कर देखना सही नहीं है। वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीति पर असर ठोस नीतियों, युद्धों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर निर्भर करता है, न कि धार्मिक या पारंपरिक भविष्यवाणियों पर।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ऐसी भविष्यवाणियां अक्सर प्रतीकात्मक या आस्था पर आधारित होती हैं, जिनका उद्देश्य भविष्य की निश्चित भविष्यवाणी करना नहीं होता। इसलिए इन्हें वास्तविक घटनाओं के रूप में प्रस्तुत करना गलत सूचना को बढ़ावा दे सकता है।
फिलहाल यह पूरा मामला सोशल मीडिया दावों, धार्मिक मान्यताओं और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों की चर्चाओं के बीच उलझा हुआ है, जिसकी सत्यता को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
