सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यदि समय रहते इस गलती को नहीं पकड़ा जाता तो भविष्य में यहां बड़ा हादसा हो सकता था। दरअसल रेती मंडी ब्रिज के टर्निंग पॉइंट पर सड़क की चौड़ाई केवल 7.50 मीटर रखी गई थी। जब मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी MANIT की विशेषज्ञ टीम ने प्रूफ चेक किया तो इसे गंभीर तकनीकी खामी बताया गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी कम चौड़ाई वाले टर्न पर भारी वाहनों और तेज रफ्तार ट्रैफिक के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता था। इसके बाद लोक निर्माण विभाग को पूरे डिजाइन में बदलाव करना पड़ा है। अब इस टर्निंग पॉइंट की चौड़ाई 7.50 मीटर से बढ़ाकर 10 मीटर की जा रही है।
नई चौड़ाई को सपोर्ट देने के लिए दो अतिरिक्त पिलर भी लगाए जाएंगे। यानी जो काम शुरुआती प्लानिंग में होना चाहिए था, उसे अब निर्माण के बीच में बदलना पड़ रहा है। इससे न केवल प्रोजेक्ट की लागत बढ़ेगी बल्कि काम पूरा होने में भी और देरी होगी।
तकनीकी विशेषज्ञ अतुल सेठ ने कहा कि उन्होंने पहले ही इस खामी की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। उनके अनुसार किसी भी बड़े टर्निंग पॉइंट पर इतनी कम चौड़ाई पर्याप्त नहीं मानी जाती। अगर समय रहते सुधार नहीं किया जाता तो भविष्य में यह ब्रिज गंभीर हादसों का कारण बन सकता था।
मामले को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने लोक निर्माण विभाग पर तीखा हमला बोलते हुए इसे सरकारी लापरवाही का उदाहरण बताया है। कांग्रेस प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला ने आरोप लगाया कि इंदौर को प्रयोगशाला बनाकर बिना उचित प्लानिंग के निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कभी 90 डिग्री ब्रिज बनाया जाता है, कभी पिलर गायब हो जाते हैं और अब रेती मंडी ब्रिज में तकनीकी खामी सामने आ रही है।
रेती मंडी ब्रिज अब केवल अधूरा प्रोजेक्ट नहीं बल्कि सरकारी सिस्टम की कार्यशैली और इंजीनियरिंग की कमजोरियों पर बड़ा सवाल बन चुका है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और इंजीनियरों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।
