बैरिकेड्स हटने की खबर मिलते ही स्थानीय लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर पटाखे फोड़कर खुशी जताई। लोगों का कहना है कि नई व्यवस्था से रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हो रही थी और शहर में अनावश्यक ट्रैफिक दबाव बढ़ रहा था।
प्रशासन ने कुछ महीनों पहले बढ़ते ट्रैफिक को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सरदार वल्लभभाई पटेल चौराहे के सर्कल को छोटा कर वन-वे व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत चौराहे पर बैरिकेड्स लगाए गए थे। नई व्यवस्था के कारण अफीम गोदाम रोड, नई आबादी और संजीत नाका की ओर जाने वाले वाहन चालकों को सीधे मार्ग की बजाय सिटी क्राउन होटल या महाराणा प्रताप चौराहा होकर निकलना पड़ रहा था। इससे लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी और दूसरे मार्गों पर भी जाम की स्थिति बनने लगी थी।
स्थानीय नागरिकों का आरोप था कि बिना पर्याप्त योजना और जनसुनवाई के लागू की गई इस व्यवस्था ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। इसी के विरोध में कुछ दिन पहले जिला पंचायत सदस्य दीपक सिंह गुर्जर के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने चौराहे पर धरना-प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी हुई थी।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार मीना ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर एक महीने के भीतर व्यवस्था की समीक्षा करने और बैरिकेड्स हटाने का आश्वासन दिया था। हालांकि लगातार बढ़ते विरोध और राजनीतिक दबाव के चलते प्रशासन ने तय समय से पहले ही बैरिकेड्स हटाने का फैसला कर लिया।
दीपक सिंह गुर्जर ने आरोप लगाया कि सर्कल छोटा करने और बैरिकेड्स लगाने से चौराहे पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया था और लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने बैरिकेड्स हटाने का श्रेय आम जनता के संघर्ष को दिया।
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों में भाजपा से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी प्रशासनिक अधिकारियों से बैरिकेड्स हटाने की मांग की थी। अब पुरानी व्यवस्था बहाल होने के बाद लोगों ने राहत महसूस की है और चौराहे पर यातायात पहले की तुलना में अधिक सुगम दिखाई दे रहा है।
