मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कांग्रेस और उसके नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में विकास की गति तेज है, लेकिन कांग्रेस लगातार उसका विरोध कर रही है। उन्होंने कांग्रेस संगठन की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा प्रदेशाध्यक्ष पहले कभी नहीं देखा गया जिसके कार्यकाल में इंदौर लोकसभा सीट का उम्मीदवार चुनाव मैदान छोड़कर चला जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को उम्मीदवार तक नहीं मिल रहे हैं और पार्टी अपने राजनीतिक कर्मों का परिणाम भुगत रही है।
मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी के बाद कांग्रेस नेताओं में नाराजगी बढ़ गई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें रद्दी और दो कौड़ी का कहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसान का बेटा होना दो कौड़ी का होना है। पटवारी ने यह भी कहा कि चुनाव हारना कोई अपराध नहीं है और देश के कई बड़े नेताओं को भी चुनावी हार का सामना करना पड़ा है।
विवाद बढ़ने के बाद प्रदेश के कई हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। कुछ स्थानों पर पुतला दहन की घटनाएं भी सामने आईं। हालांकि जीतू पटवारी ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि कांग्रेस गांधीवादी विचारधारा में विश्वास रखती है और किसी भी प्रकार की घृणा या आक्रामक विरोध उसकी संस्कृति का हिस्सा नहीं है।
पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री के बयान का जवाब पुतला जलाकर नहीं बल्कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से दिया जाना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे किसी भी स्थान पर पुतला दहन न करें और विरोध दर्ज कराने के लिए फूल और माला जैसे प्रतीकात्मक माध्यमों का उपयोग करें। उनका कहना था कि घृणा का जवाब घृणा नहीं हो सकता और कांग्रेस प्रेम, संवाद तथा लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास करती है।
इस पूरे विवाद पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि मुख्यमंत्री को अपने पद की गरिमा और भाषा की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारें विकास की बजाय विभिन्न घोटालों के कारण अधिक चर्चित रही हैं। वहीं अन्य कांग्रेस नेताओं ने भी मुख्यमंत्री की टिप्पणी को अनुचित बताते हुए इसकी आलोचना की है।
दूसरी ओर भाजपा ने मुख्यमंत्री का बचाव किया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि राजनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन लगातार कांग्रेस की ओर से किया जाता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जीतू पटवारी स्वयं कई बार विवादित टिप्पणियां कर चुके हैं और अब अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहे हैं।
दरअसल इस पूरे विवाद की शुरुआत उस समय हुई थी जब सतना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर कटाक्ष करते हुए उन्हें ‘मोहन लाल अभिनंदन यादव’ कहा था। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी का सिलसिला शुरू हुआ जो अब प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह राजनीतिक विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या फिर प्रदेश की राजनीति में और अधिक गर्माहट पैदा करता है। फिलहाल कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपने-अपने नेताओं के समर्थन में खुलकर मैदान में उतर चुकी हैं।
