नीलेश यादव जिला ब्यूरो
नर्मदापुरम 24,सितम्बर,2026 (हिन्द संतरी ) जिले में रेशम पालन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को स्वरोजगार एवं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। ग्राम पलियापिपरिया की श्रीमती ज्योतिबाई ने शहतूत पौधरोपण एवं रेशम कीट पालन को स्वरोजगार का माध्यम बनाकर परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने का कार्य किया है।
श्रीमती ज्योतिबाई, पत्नी श्री मोहन, शासकीय रेशम केन्द्र पलियापिपरिया में कार्यरत हैं। आदिवासी वर्ग से आने वाली श्रीमती ज्योतिबाई का सपना था कि वे अपने ग्राम में ही स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनें और परिवार के पालन-पोषण में आर्थिक सहयोग प्रदान करें। इसी उद्देश्य से उन्हें स्वावलंबन योजना के अंतर्गत शासकीय रेशम केन्द्र पलियापिपरिया में एक एकड़ क्षेत्र में शहतूत (मलबरी) पौधरोपण के लिए भोगाधिकार प्रदान किया गया।
श्रीमती ज्योतिबाई ने वर्ष 2010-11 में एक एकड़ क्षेत्र में शहतूत पौधरोपण कर रेशम कीट पालन का कार्य प्रारंभ किया। इसके बाद उन्होंने नियमित रूप से रेशम कीट पालन करते हुए ककून उत्पादन से आय अर्जित की और परिवार के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित किया।
रेशम विभाग द्वारा उन्हें समय-समय पर रेशम कीट पालन की उन्नत तकनीक, तकनीकी मार्गदर्शन तथा उच्च गुणवत्ता वाले ककून उत्पादन के लिए आवश्यक जानकारी एवं प्रोत्साहन प्रदान किया जाता रहा। विभाग द्वारा उच्च गुणवत्ता एवं उन्नत प्रजाति के रेशम बीज भी उपलब्ध कराए गए, जिससे ककून उत्पादन की गुणवत्ता एवं आय में निरंतर वृद्धि हुई।
वर्तमान में श्रीमती ज्योतिबाई ने एक एकड़ क्षेत्र से ककून उत्पादन कर 1 लाख 72 हजार 872 रुपये की आय अर्जित की है। उन्होंने ककून मार्केट में अपने उत्पाद का विक्रय कर अच्छी दर प्राप्त की। रेशम पालन से प्राप्त आय ने उन्हें अपने गृह ग्राम में ही स्वरोजगार का अवसर उपलब्ध कराया है।
श्रीमती ज्योतिबाई बताती हैं कि रेशम की खेती एवं कीट पालन के माध्यम से उन्हें अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का अवसर मिला है। उनके लिए रेशम पालन केवल आय का साधन नहीं, बल्कि गृह ग्राम में रहकर स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ने का माध्यम भी बना है।
